प. सिंहभूम की सात खनन कंपनियों पर 700 करोड़ का जुर्माना

Dainik Jagran, Chaibasa | सुधीर पांडेय | Nov 11, 2019

पश्चिमी सिंहभूम जिले की लौह अयस्क खदानों से खनन करने वाली कंपनियों ने समय पर बकाया भुगतान नहीं किया। अब जिला खनन विभाग ने सात कंपनियों पर सूद समेत करीब 700 करोड़ रुपये की जुर्माना लगाकर वसूली के लिए मुकदमा किया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर कंपनियों की संपत्ति जब्त होगी और बैंक खाते सीज किए जाएंगे।

दरअसल पश्चिमी सिंहभूम की करीब 16 खनन कंपनियों ने लीज मिलने के बाद सभी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना खनन शुरू कर दिया। यह सिलसिला 2000 से लेकर 2016 तक चला। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। कोर्ट ने सभी लौह अयस्क खनन कंपनियों को 31 दिसंबर 2017 तक खनिज मूल्य मद में प्राप्त राशि को सरकार के खाते में जमा करने का आदेश दिया, लेकिन निर्धारित समय पर राशि जमा नहीं की गई है। अब विभाग ने वसूली के लिए उपनिदेशक भूतत्व कार्यालय सह नीलाम पत्र पदाधिकारी (खनन) संतोष कुमार सिंह के समक्ष नीलामपत्र वाद दायर किया है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में संबंधित लौह अयस्क कंपनियों से जुड़ी सभी प्रकार की संपत्ति की नीलामी करने की चेतावनी दी गयी है। साथ ही कंपनियों का खाता भी सीज करने के लिए कहा है। पश्चिमी सिंहभूम में जिला खनन पदाधिकारी के कार्यालय से पहली बार खनन कंपनियों के खिलाफ नीलामपत्र वाद दायर करने की कार्रवाई की गई है। यहां बता दें कि जिन खनन कंपनियों पर केस किया गया है, वर्तमान में उनमें से अधिकतर की खदानें बंद हैं। साथ ही साथ मार्च 2020 में सभी खदानों की लीज भी खत्म हो रही है। ऐसे में इतनी बड़ी देय राशि कंपनियां कैसे चुकायेंगी, यह एक बड़ा प्रश्न है।

जुर्माना नहीं चुकाने पर जब्त होगी कंपनियों की संपत्ति, बैंक खाते किए जाएंगे सीज, पहली बार खनन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई

  • सूद समेत रकम वसूली को चाईबासा में दायर किया नीलाम पत्र वाद
  • सुप्रीम कोर्ट ने 31 दिसंबर 2017 तक राशि जमा करने का दिया था आदेश

कॉमन कॉज से जुड़े सर्वोच्च कोर्ट के आदेश के आलोक में हम लोगों ने अगस्त 2017 में ही जिले की खनन कंपनियों को डिमांड लेटर (मांग पत्र) दिया था। चूंकि संबंधित कंपनियों ने निर्धारित समय पर डिमांड के अनुसार राशि जमा नहीं की इसलिए उसकी सूद सहित वसूली के लिए नीलाम पत्र वाद दायर किया गया है। डिमांड के अनुसार राशि नहीं देने पर कंपनियों के खिलाफ खनन कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

संजीव कुमार, जिला खनन पदाधिकारी, चाईबासा।

24 फीसद जुड़ गया ब्याज

सर्वोच्च न्यायालय ने 2 अगस्त 2017 को कॉमन कॉज के एक मामले में सुनवाई करते हुए सभी प्रकार की वैधानिक अनापत्ति प्राप्त किए बिना खनन करने वाली कंपनियों से खनिज मूल्य की वसूली का आदेश पारित किया था। आदेश था कि सभी संबंधित लौह अयस्क खनन कंपनियों को 31 दिसंबर 2017 तक खनिज मूल्य मद में प्राप्त राशि को सरकार के खाते में जमा कर देना था। पश्चिमी सिंहभूम की करीब 16 खनन कंपनियों ने निर्धारित समय पर राशि जमा नहीं की है। अब खनन विभाग ने मूल बकाया राशि पर 1 जनवरी 2018 से 31 अक्टूबर 2019 तक कुल 20 माह यानि 699 दिन का 24 फीसद प्रति वर्ष के हिसाब से सूद जोड़ते हुए रकम की वसूली के लिए प्रथम चरण में सात कंपनियों पर नीलाम पत्र वाद दायर किया है। वहीं, नौ खनन कंपनियों ने लगायी गयी जुर्माना राशि के खिलाफ हाइकोर्ट में केस कर रखा है। वहां मामला लंबित चल रहा है।

इन कंपनियों पर दायर हुआ है नीलाम पत्र वाद

कंपनियों ने लीज मिलने के बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना ही शुरू कर दिया था खनन कार्य

ये कंपनियां हैं कोर्ट में

सेल मेघाहातुबुरू

सेल किरीबुरू

सेल धोबिल

सेल सुकरीलुतुबुरू

सेल गुवा

बीएल नेवटिया (तीन माइंस)

ऊषा मार्टिन

31 दिसंबर तक खनिज मूल्य मद में प्राप्त राशि को सरकार के खाते में जमा करने का आदेश दिया

अगस्त माह में जिले की खनन कंपनियों को डिमांड लेटर दिया गया था लेकिन किसी ने राशि जमा नहीं की।

में सभी खदानों की लीज भी खत्म हो रही है वर्तमान मेंअधिकतर खदानें बंद हैं

हर साल के हिसाब से सूद जोड़ते हुए वसूल की जाएगी रकम, प्रथम चरण में 7 कंपनियों पर नीलाम पत्र वाद दायर किया है।

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