राजस्थान सरकार ने सिलिकोसिस काे लेकर मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट, अब हर बुधवार को एकेएच में होगी स्क्रीनिंग

Dainik Bhaskar | Jan 22, 2020

बिना सुरक्षा कार्य कर रहे श्रमिक समूचे मगरा इलाके में खेती लायक भूमि नहीं होने और रोजगार का कोई दूसरा साधन…

बिना सुरक्षा कार्य कर रहे श्रमिक

समूचे मगरा इलाके में खेती लायक भूमि नहीं होने और रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र समेत शहरी इलाके के सैकड़ों लोगों के सामने रोजगार का एकमात्र साधन ब्यावर और आस पास स्थापित पत्थर पीसने की फैक्ट्रियों में मजदूरी करना रह जाता है। इन फैक्ट्रियों में ब्यावर और आस पास के ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर के श्रमिक मजदूरी करते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि यह मजदूर भी सिलिकोसिस की भयावहता से अवगत होने के बावजूद यहां कार्य कर रहे हैं और इन श्रमिकों को नियमानुसार जो सुरक्षा के साधन उपलब्ध करवाए जाने चाहिए वह भी कागजों में ही मिल रहे हैं। हालांकि फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि वह श्रमिकों को मास्क उपलब्ध करवाते हैं लेकिन मजदूर मास्क नहीं पहनते।

तीन साल से चक्कर काट रही विधवा

ब्यावर के रीको इंडस्ट्रीयल एरिया निवासी लक्ष्मी के पति भरत को 31 मार्च 2017 में सिलिकोसिस का प्रमाण पत्र ऑफ लाइन जारी किया गया। तीन माह बाद 3 जून 2017 में भरत की मृत्यु हो गई। अपने पति की मृत्यु के बाद से अभी तक तीन साल हो गए उसकी प|ी लक्ष्मी को अभी तक मुआवजा राशि जारी नहीं हो सकी है। लक्ष्मी ने बताया कि पहले बीमारी का सार्टिफिकेट ऑफलाइन होने के कारण वह अजमेर जाती तो उसे बोला जाता कि उसके मुआवजे की प्रक्रिया ब्यावर स्तर पर रुकी है और ब्यावर में बोला जाता कि कलेक्टर ऑफिस से उसका मुआवजा जारी नहीं हो रहा। करीब 1 साल पूर्व उसके पति की बीमारी और मृत्यु का सार्टिफिकेट ऑनलाइन हो गए। लेकिन उसके बाद भी अभी तक लक्ष्मी को मुआवजा नहीं मिल सका है। मंगलवार को भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद लक्ष्मी को भी उम्मीद जगी है कि उसे भी मुआवजा मिल सकेगा।