Mumbai-Ahmedabad Bullet Train project: State to ‘forcefully’ acquire land, process to complete in two months

Mumbai Mirror | June 2, 2019

Process to complete in two months; no more negotiations with andowners, say sources.

Under pressure to complete the land acquisition process for the Mumbai-Ahmedabad Bullet Train project, the Maharashtra government has decided to take the land “forcefully” in the next two months under the Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013, also called the Land Acquisition Act. In other words, there will be no more negotiations with land-owning farmers or tribals. The Act allows the government for compulsory acquisition without the wilful consent of owner or occupant in order to benefit society; it is exercised essentially in social and public projects. Read more

नक्सल हिंसा से विस्थापित आदिवासियों की होगी घर वापसी, केंद्र कराएगा सर्वे

Dainik Jagran | May 16, 2019

दक्षिण बस्तर में 2005-06 में नक्सली हिंसा और इसके विरोध में उठे सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान पड़ोसी राज्यों में विस्थापित हुए आदिवासियों का मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। विस्थापितों की छत्तीसगढ़ में वापसी की कोशिशों में लगी संस्था सीजी नेट स्वरा ने 623 विस्थापित आदिवासी परिवारों की सूची केंद्रीय आदिम जाति कल्याण (ट्राइबल) मंत्रालय को सौंपी है। केंद्र सरकार ने सूची में शामिल परिवारों की पहचान करने, उन्होंने किन परिस्थितियों में पलायन किया, क्या वे वापस बस्तर जाना चाहते हैं, आदि तथ्यों की जांच करने को कहा है।

तीन जिलों में रहा सलवा जुडूम का आंदोलन का प्रभाव
आदिवासियों को वनाधिकार कानून के तहत वापस उनके मूल गांवों में लाने की कोशिश की जाएगी। ज्ञात हो कि बस्तर के तीन जिलों दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में सलवा जुडूम आंदोलन का प्रभाव रहा। सुकमा और बीजापुर जिलों की सीमा तेलंगाना से जुड़ी है। जुडूम के दौरान नक्सलियों ने बदला लेने के लिए आदिवासियों पर हमले किए। कोंटा इलाके के दरभागुड़ा में जुडूम समर्थकों से भरा ट्रक उड़ा दिया था। एर्राबोर समेत अन्य जुडूम कैंपों पर हमले किए।

विस्‍थापितों का आंकड़ा किसी सरकार के पास नहीं
जुडूम समर्थक भी इस दौरान अंदरूनी गांवों में जाकर ग्रामीणों को परेशान करते थे। दो पाटों के बीच फंसे आदिवासियों ने तब बार्डर पार आंध्र और तेलंगाना के जंगलों में शरण ली। पड़ोसी राज्यों में बस्तर के कितने विस्थापित हैं इसका सही आंकड़ा न छत्तीसगढ़ के पास है न तेलंगाना और आंध्र सरकार के पास। केंद्रीय ट्राइबल मंत्रालय के इस मामले में दखल से अब विस्थापितों की घर वापसी का रास्ता तय हो सकता है।

विस्‍थापितों की हालत खराब
तेलंगाना से भगाए जा रहे विस्थापित करीब 150 गांवों के तीन हजार परिवार ऐसे हैं जो बार्डर पार जंगलों में बसे हैं। वे बेहद खराब हालात में रह रहे हैं। पिछले महीने तेलंगाना के भद्रादरी कोटागुडेम जिले के मुलकुलापल्ली ब्लॉक के रसनगुडेम में वन विभाग के अफसर पहुंचे और आदिवासियों से जंगल छोड़ने को कहा। दो महीने पहले इसी इलाके में पुलिस के साथ पहुंचे वन अफसरों ने आदिवासियों के 58 घर तोड़ दिए थे।

डरे हुए हैं आदिवासी
सीजी नेट स्वरा के संस्थापक शुभ्रांशु चौधरी ने कहा कि आदिवासी घर वापसी करना चाहते हैं पर वे डरे हुए हैं। उनमें से ज्यादातर का मूल गांव बस्तर के उन जंगलों में है जो नक्सल प्रभाव वाले इलाके हैं। आदिवासी चाहते हैं कि सरकार उन्हें उनके गांव की जमीन के बदले सुरक्षित इलाके में जीवन यापन लायक जमीन दे।

वनाधिकार कानून का पेच
विस्थापित आदिवासियों के मामले में वनाधिकार कानून का भी पेच फंस रहा है। 12 दिसंबर 2005 के पहले वनभूमि में बसे लोगों को वनाधिकार पट्टा देने का कानून है। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति उसी जमीन पर लगातार काबिज रहे। आदिवासी 15 साल से अपनी जमीन छोड़कर गए हैं तो उन्हें वनाधिकार कानून का फायदा मिलेगा या नहीं यह दिक्कत है। केंद्र के दखल के बाद इसका भी हल निकलने की उम्मीद है।

How Anger Of Tribals, Minorities And Working Class Is Defining This Lok Sabha Election In Jharkhand

News Click | Shahnawaz Akhtar | May 11, 2019

Jharkhand is angry, but will the opposition be able to turn it in their favour?

Ranchi: As Jharkhand is all prepared for the third phase of Lok Sabha Elections, in which voters from Dhanbad, Giridih, Singhbhum and Jamshedpur constituencies will exercise their franchises. Last week people of Ranchi, Khunti, Hazaribagh and Koderma have cast their vote.

In the fourth and last phase, on May 19, voters of Dumka, Godda and Rajmahal will vote. Read more

Gujarat farmers, stung by poor compensation for PM’s pet projects, are fighting state govt in court

First Post | Amit Cowper | May 11, 2019

Gujarat farmers are protesting poor compensation for their land and alleged irregularities in the state government’s acquisition process.

Gandhinagar: In Gujarat, over 6,000 farmers and their families are facing the prospect of displacement and losing their fertile land to development projects. Over 5,000 hectares of fertile farmland is slated to be acquired for government projects, affecting farmers in south Gujarat. But farmers aren’t going quietly. Rather, they’re protesting poor compensation for their land and alleged irregularities in the state government’s acquisition process. Read more

‘We don’t want to die landless’: Kerala’s Adivasis are again agitating for land promised in 2001

Scroll.in| May 6, 2019

Nearly 200 landless Adivasis have been protesting for over a week after they were forcibly evicted from the Thovarimala forest in Wayanad.

On April 21, Priyanka Gandhi arrived in Kalpetta in Kerala’s Wayanad parliamentary constituency to campaign for her brother, the Congress candidate Rahul Gandhi. That same day, 25 km to the east in Thovarimala, around 200 landless Adivasi men, women and children took over a piece of forestland. They cleared some bush trees, erected huts covered over with tarpaulin and vowed to stay put until the state government gave each of their families two acres of cultivable land. Read more

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