‘Pathalgarhi demands legitimate’

“The movement and the demand for empowering gram sabhas in Fifth Schedule areas was well within constitutional provisions.”

“However,” he added, “If the gram sabha tries to reject the assembly or the Lok Sabha, it would defeat the purpose of the Constitution.” Read more

Courtesy: The Times of India

Chief Minister dedicates Pilkha Milk Processing Unit in Surajpur

Under the ongoing Atal Vikas Yatra, Chief Minister Dr Raman Singh on Wednesday visited village Silphili in Surajpur district, where he dedicated the Pilkha Milk Processing Unit.
Asserting that because of this Milk Processing Unit, the Surajpur district is gradually progressing towards white revolution. Read more

Courtesy: The Hitavada

Mining tussles in Manipur

Mining, considered one of the major economic sources of India, has long been associated with numerous controversies. And still it is a great initiative of economic activity which has significant contributions to the Indian economy. The Gross Domestic Product (GDP) contribution of the Mining sector varies from 2.2% to 2.5% but going by the GDP of the total industrial sector, it contributes around 10% to 11%. Even mining in the small scale contributes 6% to the entire cost of mineral production. It’s said that Indian mining provides job opportunities to about 7 lakhs individuals. Read more

Courtesy: E-Pao

How Haryana has failed the Aravalis

In 1900, the British had the foresight to realise that the survival of the hilly areas could be at risk without ecological safeguards. So, they introduced a land preservation act. The undivided Punjab state government continued the protection for the hills. However, after the formation of Haryana, the Aravalis have come under major threat with repeated attempts to dilute the legal cover, notwithstanding a few efforts in the 1970s and 1990s to notify some areas under the Punjab Land Preservation Act (PLPA) Read more

Courtesy: Times of India

एक्सप्रेस हाइवे के जमीनी सर्वे के साथ विरोध में आए ग्रामीण

थांदला. केंद्र सरकार द्वारा नोएडा -दिल्ली से बंबई के लिए 8 लेन एक्सप्रेस हाइवे मार्ग निर्माण की योजना स्वीकृत की गई है। इस मार्ग के बन जाने से दिल्ली-बम्बई की दूरी 200 किमी कम होगी।

मार्ग का प्रारंभिक हवाई सर्वे भी हो चुका है तो अब योजना को मूर्तरूप देने जमीनी सर्वे व निरीक्षण के लिए केंद्रीय निर्माण योजना के अधिकारी-कर्मचारी का निर्धारित मार्ग पर आगमन भी होने लगा है तो प्रशासनिक स्तर पर भी इस मार्ग पर आने वाली जमीनों के मुआवजे के प्रकरण बनाने के साथ ही दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासनिक प्रक्रिया के शुरू होते ही जयस संगठन की पहल के साथ ग्रामीणजनों ने इस मार्ग निर्माण का विरोध भी शुरू कर दिया है। मार्ग निर्माण की दावे-आपत्ति के लिए प्रशासनिक स्तर पाए 21 अगस्त को विज्ञप्ति जारी की गई थी तथा 13 सितम्बर तक दावे-आपत्ति मांगे गए थे । गुरुवार को अंतिम दिन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व थांदला के कार्यालय में क्षेत्र के 21 ग्राम पंचायतों के 39 गांवों के करीब 400 से अधिक ग्रामीणजन जय आदिवासी युवा शक्ति जयस संगठन के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय पहुंचे व सामूहिक रूप से एक्सप्रेस हाइवे मार्ग निर्माण का विरोध किया व अपनी आपत्ति दर्ज करवाई । ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति में कुछ जजमेंट के रूलिंग का हवाला देते हुए लिखा कि हम भारत के संविधान का सम्मान करते है व संवैधानिक दायरे का उपयोग करते हुए पांचवी अनुसूची 244 ;1 अनुच्छेद 13 ;3 क समता जजमेंट आंध्रप्रदेश 11.07.1997 वेदांत जजमेंट 2011पी रम्मी रेडडी 14 जुलाई 198 8 के समस्त प्रवधानों को हमारे हितों में ध्यान रखते हुए हाइवे हेतु मेरी भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए । Read more

Courtesy: Patrika Hindi News

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