DMF के उपयोग में कैसे हुआ अमूलचुर परिवर्तन, अब शहरों में नहीं

रायपुर मुनादी | July 09, 2019

अमूमन राजनीतिज्ञ चुनाव के दौरान किये गए वादे नहीं निभाते हैं खासकर जब मामला उद्योगों से प्रभावित लोगों की बात हो। छत्तीसगढ़ अपने उदय के साथ ही उद्योगों का चारागाह बन गया था खासकर रायगढ़, कोरबा, कोरिया, चिरमिरी, बस्तर जैसे तमाम जिले उद्योगों के दिये विकास के दर्द से कराह रहे थे। आम आदमी के लिए बनने वाली योजनाएं भी आम आदमी तक नहीं पहुँच पाती थी।

इनकी बात विपक्ष के तौर पर कांग्रेस करती रही थी लेकिन सत्ता में आने के बाद भूपेश बघेल ने जैसे ही सत्ता संभाली उन्होंने DMF के नियमों में वैसा ही बदलाव कर दिया जैसा जनसंगठन बहुत पहले से कहते रहे। पहले DMF (खनिज न्यास निधि) का उपयोग सभी सरकारी कार्यों के लिए कर दिया जाता था जबकि प्रभावित गांव मुंह ताकते रहते थे। DMF का उपयोग सरकारी बंगले से लेकर पार्क बनाने तक में उपयोग किया जा रहा था जबकि जनसंगठनों की हमेशा से मांग रही थी कि DMF का ज्यादातर हिस्सा प्रभावित गांव में खर्च किया जाय। पिछले साल सराइटोली गांव में जब भूपेश बघेल गए थे तब उन्होंने सरकार आने पर DMF के लिए कहा था कि इसमें परिवर्तन किया जाएगा। रायगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी और सविता रथ द्वारा सुझाये गए के बातों को नए संशोधन में जगह दी गई है।

छत्तीसगढ़ DMF नियम में किये गए संशोधन की प्रमुख बातें

  1. नए संशोधनों के बाद अब DMF राशि से शासकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन और उन्हें प्रभावी बनाने के काम किए जा सकेंगे।
  2. खनन और खनन संबंधी गतिविधियों से प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों के परिवार के सदस्यों को नर्सिंग, चिकित्सा शिक्षा, इंजीनियरिंग, विधि, प्रबंधन, उच्च शिक्षा, व्यवसायिक पाठ्यक्रम, तकनीकी शिक्षा, शासकीय संस्थाओं, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक शुल्क और छात्रावास शुल्क के भुगतान के साथ ही सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और आवासीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी इस मद से की जा सकेगी।
  3. प्रभावित क्षेत्रों में दक्ष और योग्य मानव संसाधन जैसे डॉक्टरों, नर्सों और शिक्षकों आदि की आवश्यकता की पूर्ति भी DMF से की जा सकेगी।
  4. कृषि उत्पादों के संग्रहण, भंडारण एवं प्रसंस्करण, खाद्य प्रसंस्करण, लघु वनोपज प्रसंस्करण, वनौषधि प्रसंस्करण, खेती में उन्नत तकनीकों के प्रयोग, जैविक खेती, पशु नस्ल सुधार और गोठान विकास के कार्यों को भी अब DMF से किया जा सकेगा।
  5. खनन प्रभावित वन अधिकार पट्टाधारकों के जीवनस्तर में सुधार एवं आजीविका संवर्धन के उपाय भी इससे किए जाएंगे।
  6. DMF निधि से कराए जाने वाले कार्यों की बेहतर निगरानी और उनका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ का गठन किया जायेगा ।
  7. ऐसे जिले जहां DMF की प्राप्ति राशि सालाना 25 करोड़ रूपए या इससे अधिक है, उन जिलों में प्रभावित क्षेत्रों व व्यक्तियों के चिन्हांकन, सर्वेक्षण, कार्यों की निगरानी तथा विजन दस्तावेज तैयार करने न्यास में सूचीबद्ध संस्थाओं के माध्यम से सर्वेक्षण एवं सोशल ऑडिट कराया जाएगा।
  8. क्षेत्र के लिए चिन्हित आवश्यकताओं की पूर्ति और पांच साल का विजन प्लान तैयार करने के लिए संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
  9. जिन जिलों में DMF की वार्षिक प्राप्ति राशि 25 करोड़ रूपए से कम है, वहां ये कार्य जिले में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञों के माध्यम से कराए जाएंगे
  10. DMF में प्राप्त राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों पर तथा शेष राशि अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावितों पर खर्च की जाएगी।
  11. शासी परिषद में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामसभा के 10 सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित की जाएगी। खनन क्षेत्र के ग्रामसभा के साथ ही नजदीक के ग्रामसभा के सदस्यों के नामांकन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अनुसूचित क्षेत्रों में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग से नामांकित किए जाएंगे।